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हाईकोर्ट ने दिया विष्णुदेव साय को बड़ा मौका, अगर ये काम किया तो वाशिंग मशीन से धूल जाएंगे सारे दाग

रायपुर। प्रमोशन में आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट के निर्णय आने के बाद प्रदेश के एससी, एसटी वर्ग के लाखों अधिकारी-कर्मचारी, अब विष्णुदेव सरकार की ओर उम्मीद भरे नजरो से देख रही है। प्रदेश के कर्मचारियों ने पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश सरकार पर भरोसा जताया था लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। बिलासपुर हाईकोर्ट ने विष्णुदेव सरकार को तीन माह के भीतर प्रमोशन में आरक्षण मामले पर पुनः नीति बनाने कहा है। कोर्ट ने एक तरह से भाजपा और विष्णुदेव सरकार को एक बड़ा अवसर दे दिया हैं, चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश के 45 प्रतिशत जनसंख्या वाले अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति को प्रभावित करता है। ऐसे में प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था बनाकर, विष्णुदेव सरकार न सिर्फ भाजपा के आरक्षण विरोधी होने के आरोप को ख़ारिज करेगी बल्कि उन्हें रिमोट कंट्रोल कहने वाले विरोधियों को करार जवाब मिलेगा। इसके साथ ही भाजपा एससी-एसटी वर्ग का भरोसा जीत पायेगी।

 

यह सच है कि भाजपा पर आज भी आरक्षण विरोधी होने के आरोप लगते है। भाजपा नेताओं के विवादित बयान का हवाला देकर आम चुनाव में विपक्षी नेता भाजपा को संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी साबित करने में कोई कसार नहीं छोड़ रही। वही छत्तीसगढ़ के एससी-एसटी वर्ग का भाजपा पर पूरी तरह विश्वास कायम नहीं हो पाया हैं।

 

 

इसलिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने चुनावी सभाओं में कहते दिख रहे कि भाजपा की सरकार में किसी भी वर्ग के आरक्षण में कटौती नहीं की जाएगी। आरक्षित वर्ग हाथ से न फिसले इसलिए सभा में भाजपा के स्टार प्रचारक केंद्रीय मंत्री भी कहते दिखे… न संविधान ख़त्म होगा और न ही आरक्षण।

इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि जून के अंत या जुलाई में प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से नया नोटिफिकेशन आ सकता है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद भी अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। इसमें प्रमोशन में एसटी के लिए 32 फीसदी और एससी के लिए 13 फीसदी आरक्षण रह सकता है। यदि ऐसे होता है तो इससे भाजपा की पकड़ एससी एसटी वर्ग में और गहरा हो जायेगा।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने ‘प्रमोशन में आरक्षण’ को लेकर हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन शुरू कर दिया है। हालाँकि आगे की कार्यवाही के लिए आचार संहिता का हवाला दिया जा रहा है । आगामी तीन महीने में भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस मामले को किस तरह से रफा-दफा करेगी, यह कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

 

भ्रम: प्रमोशन में आरक्षण रद्द! जाने क्या है पूरा मामला..
मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण के मामले में फैसला दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि अदालत ने प्रमोशन पर आरक्षण खत्म कर दिया है। इस मामले में अभियोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि कोर्ट ने वह नोटिफिकेशन ही रद्द किया है, जो कांग्रेस की भूपेश सरकार 22 अक्टूबर 2019 को लेकर आई थी। प्रमोशन में आरक्षण रद्द नहीं हुआ, बल्कि हाईकोर्ट ने भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार को निर्देश दिए हैं कि इस आदेश की कॉपी मिलने से तीन महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट की ओर से समय-समय पर जारी मापदंडों के अनुरूप प्रमोशन में आरक्षण की नीति पर फिर से कार्य करते हुए इसे रीफ्रेम किया जाए।

भाजपा के पाले में मौका
कांग्रेस के भूपेश सरकार का नोटिफिकेशन रद्द होने के बाद प्रमोशन में आरक्षण को लेकर गेंद पूरी तरह भाजपा के विष्णुदेव साय सरकार के पाले में आ गई है। नए नोटिफिकेशन के जरिए सरकार आरक्षण में प्रमोशन को पूरी तरह रद्द करेगी या फिर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसले को जारी रखेगी, यह फैसला अब पूरी तरह से विष्णुदेव साय की भाजपा सरकार को ही करना है। प्रमोशन में आरक्षण लागु हो तो, भाजपा और विष्णुदेव सरकार पर रिमोट कंट्रोल और आरक्षण विरोधी होने के विरोधियों के आरोप और बनाई गई छाप मिट जाएगी!

 

तीन माह बाद की रणनीति तैयार..
“प्रमोशन में आरक्षण” मामले में कोट के निर्णय को लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों में निराशा है। वही इस मामले को लेकर एससी एसटी वर्ग के कर्मचारी संगठनों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। रविवार को राजधानी रायपुर में एससी एसटी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों ने इसी मामले को लेकर संयुक्त बैठक किया। जिसमे दोनों वर्गों के कर्मचारी संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से “प्रमोशन में आरक्षण” की लड़ाई को हर मोर्चे पर लड़ने के लिए सहमती बनी है। हाई कोर्ट के निर्देशनुसार यदि विष्णुदेव सरकार प्रमोशन में आरक्षण पर व्यवस्था बनाने में कही से भी लचर दिखी तो एससी-एसटी के कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का सोच रखा है। इसके लिए पहले से ही रणनीति बना रखी है। बहरहाल आदिवासी कर्मचारी संगठन और अजाक्स कर्मचारी संगठन ने मिलकर इस मामले में अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सहित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात करने की योजना बनाई हैं।

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