धर्मसंपादकीय

जुए की लत या किसी भी वस्तु या मादक पदार्थ की लत एक मानसिक रोग -गुलाब डड़सेना

“शोध यह बताते है कि कोई भी व्यवहार या मादक पदार्थ पहली बार इस्तेमाल करने पर मानसिक खुशी देता है क्योंकि पहली बार इस्तेमाल करने पर यह हमारे शरीर में डोपामिन का स्त्राव बढ़ाता है जो हमें अच्छा महसूस कराता है, खुशी देता है और जब कभी हम दुबारा तनाव महसूस करते हैं पुनः उसी व्यवहार या पदार्थ को उपयोग करने को प्रेरित करता है और इसी तरह यह एक प्रक्रिया बन जाती है और व्यक्ति लत ( एडिक्शन) की गिरफ्त में फंस जाता है।”

       गुलाब डड़सेना
(सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले एक लाचार बुजुर्ग माता-माता पिता द्वारा जुआ-सट्टा की लत में डूबे अपने पुत्र की हत्या की घटना समाने आई। ख़बर एक हृदय विदारक घटना है, ऐसी ख़बर पढ़कर मन का विचलित हो जाना स्वाभाविक है। इस तरह की घटनाओं की तादात लगातर बढ़ती जा रही है। बढ़ती घटनाओं पर मनोवैज्ञानिक एवं समाज शास्त्री द्वारा लगातार चिंतक औऱ शोध किया जा रहा है। अब समाज को भी इस तरह की बढ़ती घटनाओं पर विचार और चिंतन की जरूरत है।
इस तरह की घटनाओं पर ज़िला चिकित्सालय कबीरधाम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत कार्यरत मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर राकेश कुमार से खुल कर चर्चा हुई। उन्होंने घटना के कारकों और कारणों की बारीकी पर कई खुलासे भी किए। उन्होंने कारकों और कारणों को शोध के बाद आए परिणामों को बताया।
डॉ राकेश कुमार कबीरधाम जिले के जिला चिकित्सालय में पदस्थ है। वे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में काम कर रहे है।
डॉ राकेश कुमार का कहना है कि जुए की लत या किसी भी वस्तु या मादक पदार्थ की लत एक मानसिक रोग है। इस तरह की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा सकता है। वर्तमान में मानसिक रोगों पर हुए शोध ये बताते हैं कि लत (Addiction) एक मानसिक रोग है। लत की अवस्था तक पहुंचना एक निरंतर प्रक्रिया का परिणाम होता है। किसी भी वस्तु, व्यवहार या मादक पदार्थ की लत आरंभ में एक सामान्य प्रयोगात्मक व्यवहार जो थोड़ी बहुत खुशी या दोस्तों के साथ मनोरंजन के तौर पर शुरू होता है,लेकिन कालान्तर में यह एक विकराल समस्या बन जाती है और अंततः इसी तरह का परिणाम सामने आता है।
मानसिक रोगों का अध्ययन ये बताते हैं कि कोई भी व्यवहार या मादक पदार्थ पहली बार इस्तेमाल करने पर मानसिक खुशी देता है क्योंकि पहली बार इस्तेमाल करने पर यह हमारे शरीर में डोपामिन का स्त्राव बढ़ाता है जो हमें अच्छा महसूस कराता है, खुशी देता है और जब कभी हम दुबारा तनाव महसूस करते हैं पुनः उसी व्यवहार या पदार्थ को उपयोग करने को प्रेरित करता है और इसी तरह यह एक प्रक्रिया बन जाती है और व्यक्ति लत ( एडिक्शन) की गिरफ्त में फंस जाता है। किसी भी पदार्थ, व्यवहार या मादक पदार्थों के लत के विषय में डॉक्टर राकेश कुमार बताते हैं कि इस तरह के लत में फंसे व्यक्ति को पूर्व से ही कुछ मानसिक समस्याएं हो सकती है या उनके जीवन में तनाव के अन्य कारण भी हो सकते हैं जिनकी पहचान कर निदान किया जा सकता है और व्यक्ति को लत में पड़ने से रोका जा सकता है। विषय विशेषज्ञों के अनुसार लत में पड़ने की संभावना तब और बढ़ जाती है जब इस तरह का व्यवहार करने वाले की उम्र 22 वर्ष से कम हो। कम उम्र में व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास हो रहा होता है और इस तरह का असामान्य व्यवहार मस्तिष्क में तथा व्यवहार में बदलाव लाता है। यह तब और भी गंभीर हो जाता है जब इस व्यवहार को रोकने या बदलने का प्रयास समय रहते न किया जाए। इस समस्या को समय रहते पहचान कर उसमें कार्य करने से व्यवहार में बदलाव किया जा सकता है। लत की समस्या एक मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक समस्या है जो पूरे जीवन को तबाह कर सकता है। आत्महत्या और तलाक जैसे गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण लत रूपी गंभीर मानसिक रोग है। एडिक्शन डिसऑर्डर जिसमें मोबाइल और इंटरनेट का अत्यधिक प्रयोग तथा पोर्नोग्राफी भी आता है की समस्या से आज के इस सूचना के युग में छोटे बच्चे, महिलाएं, वयस्क से लेकर वृद्ध भी अछूते नहीं हैं और लोगों का व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन तबाह हो रहा है। लत की इस गंभीर समस्या को समय रहते पहचान कर इसका उपचार कराया जा सकता है। हालाकि इसका उपचार एक जटिल प्रक्रिया है फिर भी उपचार संभव है। मानसिक रोगों के पहचान एवम उपचार हेतू विशेषज्ञों की कमी तथा जागरूकता का अभाव इसमें पहली रुकावट है। अभी भी हमारे समाज में और चिकित्सा जगत में सामान्य मानसिक रोगों की पहचान कर इलाज की आवश्यकता को लेकर बहुत से मिथक और स्टिग्मा व्याप्त है जिसके कारण लोग चिकित्सकीय सहायता नहीं ले पाते। मनोरोग चिकित्सकों की कमी और जानकारी का अभाव आज इस समस्या के समाधान में मुख्य रुकावट का कारण है। ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत वर्तमान में सभी चिकित्सकों, ग्रामीण चिकित्सा सहायकों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर सभी मितानिनों को मानसिक रोगों की पहचान तथा उपचार के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है और लगातार प्रशिक्षण कराया जा रहा है। वर्तमान में जिला चिकित्सालय कबीरधाम में पदस्थ डॉक्टर राकेश कुमार के द्वारा सभी प्रकार के मानसिक रोगों की पहचान तथा उपचार किया जा रहा है। आत्महत्या रोकथाम संबंधी सलाह मशवरा और नशामुक्ति संबंधी सलाह तथा उपचार भी प्रदान किया जाता है। ज़िला चिकित्सालय कबीरधाम में रास्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ( स्पर्श क्लिनिक कक्ष क्रमांक 21) संचालित है। किसी भी प्रकार के मानसिक रोग, लत की समस्या के पहचान एवम उपचार के लिए संपर्क किया जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
×

Powered by WhatsApp Chat

×